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Showing posts from June, 2022

देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने

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  देखा तो तुझे जब पहली बार मैंने, अपनी आंखों पर न किया था एतबार मैंने, क्या होता है कोई इतना भी खूबसूरत, यही पूछा था खुदा से बार-बार मैंने। तेरे नीले नीले नैनो ने किया था काला जादू मुझ पर, यूं ही तो नहीं खो दिया था करार मैंने। कायदा इश्क जब से पड़ा है, इल्म बस इतना बचा है मुझ में, फकत नाम तेरा मैं लिख लेता हूं, पढ़ लेता हूं। आग बरसे चारों तरफ इस जमाने के लिए, मेरी आंखों की नमी में हो पनाह किसी को छिपाने के लिए। वो है खुदगर्ज बड़ी मैं जानता हूं, लौट आएगी फिर से खुद को बचाने के लिए। मिजाज हो गए तल्ख जब मतलब निकल गया, ना हुई दुआ कबूल तो मजहब बदल गया। वो जो कहते थे कि मेरी चाहत कि खुदा तुम हो, कभी बदली उनकी चाहत कभी खुदा बदल गया। चल मान लिया कोई तुझसे प्यारी नहीं होगी, पर शर्त लगा लो तुम से भी वफादारी नहीं होगी। तेरी बेवफाई ने मेरा इलाज कर दिया है, पक्का अब हमें फिर से इश्क की बीमारी नहीं होगी। प्यार जब भी हुआ तुमसे ही हुआ, कोशिश बहुत की मैंने किसी और को चाहने की। एक तो तेरा इश्क था ही और एक मैंने आ पकड़ा, अब कोई कोशिश भी ना करना मुझ को बचाने की। यह जो आज हम उजड़े उजड़े फिरते हैं, हसरत...

अतीत हमारी नियति नहीं है।

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माहौल निश्चित ही बहुत गर्म है। अयोध्या के राम मंदिर के बाद अब बनारस में ज्ञानवापी, मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि और दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम... इधर तो हर दिशा से मंदिर तोड़ कर मस्ज़िद तामीर किये जाने की ख़बरें अख़बार और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर नुमायां हो रही हैं। जामा मस्ज़िद के नीचे भी किसी मंदिर के होने की बात अभी कुछ दिन पहले कुछ अख़बारों में हैडलाइन बनी थी। इतिहास को लेकर हमारा नज़रिया बदल रहा है। संभव है यह बदलाव प्रायोजित हो। ( सोशल मीडिया की इस दिशा में असाधारण सक्रीयता के चलते इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।) आज से दो सौ, पांच सौ या हज़ार साल पहले घटी घटनाओं को हमने आज के संदर्भों, मूल्यों, मान्यताओं, नियमों और कानून के परिपेक्ष्य में देखना शुरू कर दिया है। अतीत को देखने का यह नज़रिया, यह नई रवायत मुझे अक्सर डराती है। यह एक ऐतिहासिक और स्थापित सत्य है कि तेरहवीं शताब्दि में शुरू हुए सल्तनत काल (तुर्क-अफगान) से ही मंदिरों का विध्वंस शुरू हो गया था। मुगल काल में भी मंदिरों को तोड़ कर मस्ज़िद बनाने का सिलसिला जारी रहा। यह भी उतना ही सच है कि बहुत से मुगल शासकों द्वारा, जिनमें बदनाम और...